Friday, May 18, 2007

किसी ने सिखाया नहीं...

मैनें लिखी है यूं तो गजलें कई.
पर तुम पर कभी लिख पाया नहीं.

Meine Likhi Hai Gazalein Yun Tau Kai,
Par Tum Pe Kabhi Likh Paaya Nahi.

अरमानों से लबालब दिल था मेरा,
फिर भी लफ़्ज़ों को मैनें पिराया नहीं.

Armaano Se Labbalab Dil Tha Mera,
Phir Bhi Lafzon Ko Meine Piraya* Nahi.

तेरे हुस्न और जवानी के जलवों से,
मेरी महफिल में कोई भी आया नहीं.

Tere Husn Aur Jawani Ke Jalwon Se,
Meri Mehfil Mein Koi Bhi Aaya Nahi.

तुझ पे ही था कुर्बान सारा जहाँ,
और मेरी राह में कोई साया नहीं.

Tujh Pe Hi Tha Kurbaan Sara Jahaan,
Aur Meri Raah Mein Koi Saaya Nahi.

आज बनायीं है मैनें जो अधूरी ग़ज़ल,
कल कहेंगे किसी ने सिखाया नहीं.

Aaj Banayi Hai Meine Jo Adhuri Gazal,
Kal Kahenge Ki Kisi Ne Sikhaya Nahi.

ना होगा मलाल अपने इस हश्र पर,
जो सच ने कभी ताज पाय नहीं.

Na Hoga Malaal Apne Iss Hashrr Par,
Jo Sach Ne Kabhi Taaj Paaya Nahi.

निशांत NYSH

*पिराया : पिरोया

*Piraya : Piroya

4 comments:

sunita (shanoo) said...

निशांत बहुत सुंदर लिखा है सबहे खूबसूरत है,..

मैनें लिखी है यूं तो गजलें कई.
पर तुम पर कभी लिख पाया नहीं

और सच को कहते हुए बोल है..

ना होगा मलाल अपने इस हश्र पर,
जो सच ने कभी ताज पाया नहीं.
बहुत अच्छा प्रयास है।
सुनीता(शानू)

परमजीत बाली said...

सुन्दर रचना है।

तुझ पे ही था कुर्बान सारा जहाँ,
और मेरी राह में कोई साया नहीं.

Udan Tashtari said...

आज बनायीं है मैनें जो अधूरी ग़ज़ल,
कल कहेंगे किसी ने सिखाया नहीं.


--बढ़िया है, निशान्त. बधाई.

Anonymous said...

"tujh pe hi tha kurban sara jahan,aur meri rah mein koi saya nai"- luvd ths lyn....a well made poem wid true feelings...i realy appreciate ur wrk bhya...