A Stranger Friend...

Once A Stranger, Came Into My Life And Became Friend,
I Never Meet, Yet It Was Nice Time Over Phone I Spent,

Sharing Sorrows And Cheery Moments, I Thanked The God,
How He Send Sylph For Me, Whom I Found At Every End,

Just Want To Say, I Miss Her, She May Have Hiccup With,
I Can't Sleep Well, Even In Dreams, I Find Her Hand In Hand,

Suddenly, I Lost Her Contact, I Entreated The Need To God,
It Is Not Easy To Find A Friend, Who Can Indeed Understand.

...I Want You Back My Friend...

तुम भी होगे इन तारों में...

भगतसिंह की शहादत को यूँ तो जमाना गुजर गया, पर भूल पाता मैं, ये मुमकिन न था. वैसे भी अब जब माहोल गरम हो गया है सियासती तानो-बानो से, तो मीडिया भी क्यूं पीछे रहे, और उन्हें भूल गया जो शामिल है हर जर्रे में, हर वजूद में, हर ख्वाब में, हर दास्ताँ में...
***
तुम भी होगे इन तारों में, तलाश काश ये रुक जाती,
सफ़र बहुत लम्बा है अब भी, आते तुम बनकर साथी,

भोली शक्ल, शराबी आँखें, लम्बा कद, मतवाली चाल,
जोश-जूनून के साथ होश भी, ताने आते तुम छाती,

निकला था मैं घर से अपने, ख्वाबों के खजाने साथ रहे,
तुम जो होते इन राहों में, मेरी तन्हाई मंजिल पाती,

उजड़ा पड़ा है चमन तुम्हारा, कोई नहीं रखवाला यहाँ,
सब लगे हैं माल बनाने, कोई न रहा अब जज्बाती,

बिसात बरसों की बिछाकर, चल रही है बे-नूर आंधी,
चुनाव जब भी सर पर आते, अक्सर तुम्हारी याद आती.

जश्न कहाँ अब ?

वो रात क़यामत वाली थी, अब दिन भी गजब के आते हैं,
उस दिन की मिली इस आज़ादी के, गीत अभी तक गाते हैं,

सूरज निकला था आधी रात, बिन बादल के, बिन बरसात,
उस दिन था कुछ जोश नया, अब होश कहीं खो जाते हैं,

कुछ रीत बनी, दस्तूर बने, ख्वाब सा हर एक दिल में सजा,
उन ख़्वाबों के हसीं गुलिस्तान, बस ख़्वाबों में ही लुभाते हैं,

फरेबी हुआ सियासत का मुलाजिम, मुट्ठी गर्म करने लगा,
लूटना ही है अगर वतन फिर, कसमें क्यूं झूठी खाते हैं,

रफा करो उस हर दीमक को, जो रवा रस्म कर पाया नहीं,
खिला गुलिस्तान सहरा बनाकर, खुशियाँ जहां की पाते हैं,

वो रात क़यामत वाली थी, अब दिन भी गजब के आते हैं,
अंधी दौड़ - पैसों की हौड बस, जश्न कहाँ अब मनाते हैं ?

  • Buzz me

    Search n' ADz

    Follow me

top